हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.15.23

कांड 9 → सूक्त 15 → मंत्र 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
अ॒पादे॑ति प्रथ॒मा प॒द्वती॑नां॒ कस्तद्वां॑ मित्रावरु॒णा चि॑केत । गर्भो॑ भा॒रं भ॑र॒त्या चि॑दस्या ऋ॒तं पिप॑र्त्यनृ॑तं॒ नि पा॑ति ॥ (२३)
हे मित्र और वरुण! तुम्हारे रूप को कौन जानता है? बिना चरणों वाली किरणें चरणों वाले प्राणियों से पहले इस जगत्‌ में आ जाती हैं. धरती इन का भार धारण करती है तथा सत्य बोलने वाले का पालन करती है. यह धरती झूठ बोलने वाले का विनाश कर देती है. (२३)
Hey friend and Varun! Who knows your look? Rays with no feet come into this world before beings with feet. The earth bears the weight of them and obeys the one who speaks the truth. This earth destroys the one who lies. (23)