हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.15.24

कांड 9 → सूक्त 15 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
वि॒राड्वाग्वि॒राट्पृ॑थि॒वी वि॒राड॒न्तरि॑क्षं वि॒राट्प्र॒जाप॑तिः । वि॒राण्मृ॒त्युः सा॒ध्याना॑मधिरा॒जो ब॑भूव॒ तस्य॑ भू॒तं भव्यं॒ वशे॒ स मे॑ भू॒तं भव्यं॒ वशे॑ कृणोतु ॥ (२४)
विराट्‌ ही वाणी है, विराट्‌ पृथ्वी है, विराट्‌ अंतरिक्ष है और विराट्‌ प्रजापति है. विराटू मृत्यु और साध्यों का स्वामी है. भूत और भविष्य उसी के वश में है. वही विराट्‌ भूत और भविष्य को मेरे वश में करे. (२४)
Virat is the voice, the vast is the earth, the vast is space and the vast is prajapati. Viruthu is the master of death and ends. The past and the future are in his control. May he control the great past and future in my control. (24)