अथर्ववेद (कांड 9)
यत्ते॑ काम॒ शर्म॑ त्रि॒वरू॑थमु॒द्भु ब्रह्म॒ वर्म॒ वित॑तमनतिव्या॒ध्यं कृ॒तम् । तेन॑ स॒पत्ना॒न्परि॑ वृङ्ग्धि॒ ये मम॒ पर्ये॑नान्प्रा॒णः प॒शवो॒ जीव॑नं वृणक्तु ॥ (१६)
हे कामदेव! तुम्हारा जो कल्याणकारी बल तीनों लोकों को पराजित करने वाला है, उस के एवं ब्रह्म रूपी विस्तृत कवच के द्वारा तुम मेरे शत्रुओं का विनाश करो. उन का जीवन एवं पशु प्राणहीन हो जाएं. (१६)
O Cupid! Destroy my enemies through your welfare force which is going to defeat the three worlds and the wide armor of Brahman. Their lives and animals become lifeless. (16)