हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.2.17

कांड 9 → सूक्त 2 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
येन॑ दे॒वा असु॑रा॒न्प्राणु॑दन्त॒ येनेन्द्रो॒ दस्यू॑नध॒मं तमो॑ नि॒नाय॑ । तेन॒ त्वं का॑म॒ मम॒ ये स॒पत्ना॒स्तान॒स्माल्लो॒कात्प्र णु॑दस्व दू॒रम् ॥ (१७)
हे कामदेव! जिस शक्ति के द्वारा इंद्र ने दैत्यों को मृत्यु रूपी भयानक अंधकार में धकेल दिया था और देवों ने जिस शक्ति के द्वारा असुरों को भगा दिया था, तुम उसी शक्ति के द्वारा मेरे शत्रुओं को इस लोक से दूर भगा दो. (१७)
O Cupid! The power by which Indra pushed the demons into the terrible darkness of death and the power by which the devas drove away the asuras, you should drive my enemies away from this world through the same power. (17)