हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.4.11

कांड 9 → सूक्त 4 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
य इन्द्र॑ इव दे॒वेषु॒ गोष्वे॑ति वि॒वाव॑दत् । तस्य॑ ऋष॒भस्याङ्गा॑नि ब्र॒ह्मा सं स्तौ॑तु भ॒द्रया॑ ॥ (११)
जिस प्रकार इंद्र देवों के मध्य में आते हैं, उसी प्रकार यह बैल गर्जन करता हुआ गायों के मध्य जाता है. ब्रह्मा अपनी मंत्रमयी कल्याणी वाणी से इस बैल के अंगों की स्तुति करें. (११)
Just as Indra comes in the middle of the gods, so this bull roars and goes among the cows. Brahma praise the limbs of this bull with his mantra-loving Kalyani speech. (11)