अथर्ववेद (कांड 9)
श॑त॒याजं॒ स य॑जते॒ नैनं॑ दुन्वन्त्य॒ग्नयः॑ । जिन्व॑न्ति॒ विश्वे॒ तं दे॒वा यो ब्रा॑ह्म॒ण ऋ॑ष॒भमा॑जु॒होति॑ ॥ (१८)
जो ब्राह्मण बैल का दान करता है, वह शतयाज नामक यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त करता है. उसे अग्नि देव संताप नहीं देते और सभी देव उसे संतुष्ट करते हैं. (१८)
The Brahmin who donates the bull gets the virtue of performing a yajna called Shatayaj. Agni Dev does not give him anger and all the gods satisfy him. (18)