हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.4.19

कांड 9 → सूक्त 4 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
ब्रा॑ह्म॒णेभ्य॑ ऋष॒भं द॒त्त्वा वरी॑यः कृणुते॒ मनः॑ । पुष्टिं॒ सो अ॒घ्न्यानां॒ स्वे गो॒ष्ठेऽव॑ पश्यते ॥ (१९)
जो व्यक्ति ब्राह्मणों को बैल का दान कर के अपने मन को उदार बनाता है, वह अपनी गोशाला में गायों की समृद्धि देखता है. (१९)
A person who liberalizes his mind by donating bulls to Brahmins sees the prosperity of cows in his gaushala. (19)