हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.5.16

कांड 9 → सूक्त 5 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒जो॒स्यज॑ स्व॒र्गोसि॒ त्वया॑ लो॒कमङ्गि॑रसः॒ प्राजा॑नन् । तं लो॒कं पुण्यं॒ प्र ज्ञे॑षम् ॥ (१६)
हे अज! तू स्वर्ग है. तेरे द्वारा ही अंगिरावंशी ऋषियों ने स्वर्ग को जाना है. मैं ने भी तेरे द्वारा उस पुण्यशाली लोक का ज्ञान प्राप्त किया है. (१६)
O Aj! You are heaven. It is through you that the Sages of Angiravanshi have known heaven. I have also gained the knowledge of that virtuous world through you. (16)