हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.5.17

कांड 9 → सूक्त 5 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
येना॑ स॒हस्रं॒ वह॑सि॒ येना॑ग्ने सर्ववेद॒सम् । तेने॒मं य॒ज्ञं नो॑ वह॒ स्वर्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे ॥ (१७)
हे अग्नि! अपने जिस बालक के द्वारा तुम हजारों प्रकार के ऐश्वर्य को देवों तक ले जाते हो, स्वर्ग प्राप्ति के निमित्त हमारे इस यज्ञ को उसी बल के द्वारा देवताओं तक पहुंचाओ. (१७)
O agni! The child through which you take thousands of types of opulence to the gods, in order to attain heaven, convey this sacrifice of ours to the gods through the same force. (17)