हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.5.19

कांड 9 → सूक्त 5 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
यं ब्रा॑ह्म॒णे नि॑द॒धे यं च॑ वि॒क्षु या वि॒प्रुष॑ ओद॒नाना॑म॒जस्य॑ । सर्वं॒ तद॑ग्ने सुकृ॒तस्य॑ लो॒के जा॑नी॒तान्नः॑ सं॒गम॑ने पथी॒नाम् ॥ (१९)
अज के ओदन की जिन बूंदों को ब्राह्मणों के मध्य एवं प्रजाओं में स्थापित करते हैं, हे अग्नि देव! वह सब हमें पुण्यात्माओं के लोक में एवं भागों के संगम में जानें. (१९)
O Agni God, the drops of Aj's odan that he establishes among the Brahmins and the subjects! All of them know us in the world of the saints and in the confluence of parts. (19)