अथर्ववेद (कांड 9)
स॑मा॒नलो॑को भवति पुन॒र्भुवाप॑रः॒ पतिः॑ । यो॒जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति ॥ (२८)
जो दक्षिणा से प्रकाशित अज को पंचौदन के रूप में दान करता है, वह पुनर्विवाहिता के साथ समान लोकों में निवास करता है. (२८)
One who donates aj published from Dakshina as Panchaudan resides in the same worlds with remarriage. (28)