हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.5.37

कांड 9 → सूक्त 5 → मंत्र 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒जं च॒ पच॑त॒ पञ्च॑ चौद॒नान् । सर्वा॒ दिशः॒ संम॑नसः स॒ध्रीचीः॒ सान्त॑र्देशाः॒ प्रति॑ गृ॒ह्णन्तु॑ त ए॒तम् ॥ (३७)
पंचौदन रूप अज को पकाओ. अंतर्दिशाओं के सहित दिशाएं एकमत हो कर अंतर्देशों सहित उसे ग्रहण करे. (३७)
Cook panchodana roop aj. The directions with the indigences should be unanimous and accept it with the inlands. (37)