हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.103.5

मंडल 1 → सूक्त 103 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 103
तद॑स्ये॒दं प॑श्यता॒ भूरि॑ पु॒ष्टं श्रदिन्द्र॑स्य धत्तन वी॒र्या॑य । स गा अ॑विन्द॒त्सो अ॑विन्द॒दश्वा॒न्स ओष॑धीः॒ सो अ॒पः स वना॑नि ॥ (५)
हे यजमानो! इंद्र के प्रबुद्ध एवं विस्तृत शौर्य को देखो एवं इस पर श्रद्धा करो. इंद्र ने गायों, अश्वों ओषधियों, जलों एवं वनों को प्राप्त किया. (५)
O hosts! Look at indra's enlightened and detailed bravery and pay homage to it. Indra received cows, horses, herbs, water and forests. (5)