हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.104.9

मंडल 1 → सूक्त 104 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 104
अ॒र्वाङेहि॒ सोम॑कामं त्वाहुर॒यं सु॒तस्तस्य॑ पिबा॒ मदा॑य । उ॒रु॒व्यचा॑ ज॒ठर॒ आ वृ॑षस्व पि॒तेव॑ नः श‍ृणुहि हू॒यमा॑नः ॥ (९)
हे इंद्र! हमारे सम्मुख आओ, क्योंकि प्राचीन लोगों ने तुम्हें सोमप्रिय बताया है. यह सोम निचुड़ा हुआ रखा है, इसे पीकर प्रसन्न बनो. विस्तीर्ण शरीर वाले बनकर हमारे उदरों में सोमरस की वर्षा करो. जिस प्रकार पिता पुत्र की बात सुनता है, उसी प्रकार हमारे द्वारा बुलाए हुए तुम हमारी बात सुनो. (९)
O Indra! Come before us, for the ancients have called you somptirs. It's kept som niggled, be happy to drink it. Become those with a wide body and rain somras in our stomachs. Just as the Father listens to the Son, so listen to Us as you are called by Us. (9)