हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.105.9

मंडल 1 → सूक्त 105 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 105
अ॒मी ये स॒प्त र॒श्मय॒स्तत्रा॑ मे॒ नाभि॒रात॑ता । त्रि॒तस्तद्वे॑दा॒प्त्यः स जा॑मि॒त्वाय॑ रेभति वि॒त्तं मे॑ अ॒स्य रो॑दसी ॥ (९)
ये जो सूर्य की सात किरणें हैं, उन में मेरी नाभि संबद्ध है. आप्त्य ऋषि अर्थात्‌ मैं यह जानता हूं और कुएं से निकलने के लिए सूर्यकिरणों की स्तुति करता हूं. हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (९)
These are the seven rays of the sun, in which my navel is associated. The sage of Aptya i.e. I know this and praise the suryakirans for coming out of the well. O earth and sky! Know this thing of mine. (9)