ऋग्वेद (मंडल 1)
तक्ष॒न्रथं॑ सु॒वृतं॑ विद्म॒नाप॑स॒स्तक्ष॒न्हरी॑ इन्द्र॒वाहा॒ वृष॑ण्वसू । तक्ष॑न्पि॒तृभ्या॑मृ॒भवो॒ युव॒द्वय॒स्तक्ष॑न्व॒त्साय॑ मा॒तरं॑ सचा॒भुव॑म् ॥ (१)
उत्तम ज्ञानपूर्वक कर्म करने वाले ऋभुओं ने अश्चिनीकुमारों के निमित्त सुंदर पहियों वाला रथ तथा इंद्र के वाहन रूप हरि नाम के दोनों घोड़ों को बनाया. उत्तम धन से युक्त तऋभुओं ने अपने माता-पिता को यौवन एवं बछड़े को सहचरी माता प्रदान की थी. (१)
The sages, who acted with great knowledge, made a chariot with beautiful wheels for the Aschinikumaras and the two horses named Hari, the vehicle form of Indra. The tambhus with the best wealth had given their parents puberty and the calf a companion mother. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
आ नो॑ य॒ज्ञाय॑ तक्षत ऋभु॒मद्वयः॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य सुप्र॒जाव॑ती॒मिष॑म् । यथा॒ क्षया॑म॒ सर्व॑वीरया वि॒शा तन्नः॒ शर्धा॑य धासथा॒ स्वि॑न्द्रि॒यम् ॥ (२)
हे ऋभुओ! हमारे यज्ञ के लिए उज्ज्वल अन्न पैदा करो. हमारे यज्ञकर्म एवं बल के निमित्त शोभन पुत्र-पौत्रादि से युक्त धन दो, जिससे हम अपनी वीर संतान के साथ सुखपूर्वक निवास करें. हमें बल के लिए अन्न दो. (२)
Hey, Lord! Create bright grains for our yajna. For the sake of our yajnakarma and strength, give us money with shobhan son-grandson, so that we may live happily with our brave children. Give us food for strength. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
आ त॑क्षत सा॒तिम॒स्मभ्य॑मृभवः सा॒तिं रथा॑य सा॒तिमर्व॑ते नरः । सा॒तिं नो॒ जैत्रीं॒ सं म॑हेत वि॒श्वहा॑ जा॒मिमजा॑मिं॒ पृत॑नासु स॒क्षणि॑म् ॥ (३)
हे यज्ञ के नेता ऋभुओ! हमारे लिए उपभोग योग्य अन्न दो. हमारे रथ के लिए धन एवं अश्व के उपभोग के लिए अन्न दो. सारा संसार हमारे जयशील अन्न की सदा पूजा करे एवं हम युद्ध में उपस्थित या अनुपस्थित शत्रु का नाश करें. (३)
O Lord of the Yajna, Ribhuo! Give us consumable food. Give money for our chariot and food for the consumption of horse. May the whole world worship our glorious food forever and let us destroy the enemy present or absent in the war. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
ऋ॒भु॒क्षण॒मिन्द्र॒मा हु॑व ऊ॒तय॑ ऋ॒भून्वाजा॑न्म॒रुतः॒ सोम॑पीतये । उ॒भा मि॒त्रावरु॑णा नू॒नम॒श्विना॒ ते नो॑ हिन्वन्तु सा॒तये॑ धि॒ये जि॒षे ॥ (४)
हम अपनी रक्षा के उद्देश्य से महान् इंद्र, ऋभुओं एवं मरुतों को सोमरस पीने के लिए बुलाते हैं. वे हमें धन, यज्ञकर्म और विजय के लिए प्रेरित करें. (४)
We call the great Indras, ribhus and maruts to drink somras for the purpose of protecting us. May they inspire us to prosper, yajnakarma and victory. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
ऋ॒भुर्भरा॑य॒ सं शि॑शातु सा॒तिं स॑मर्य॒जिद्वाजो॑ अ॒स्माँ अ॑विष्टु । तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः॒ सिन्धुः॑ पृथि॒वी उ॒त द्यौः ॥ (५)
ऋभु हमें संग्राम के निमित्त धन दें. संग्राम में विजयी बाज हमारी रक्षा करें. मित्र, वरुण अदिति, सिंधु, धरती और आकाश हमारी प्रार्थना का आदर करें. (५)
Give us money for the sake of the struggle. Let the victorious hawks in the battle protect us. Friends, Varun Aditi, Sindhu, Earth and Sky respect our prayers. (5)