ऋग्वेद (मंडल 1)
ऋ॒भुर्भरा॑य॒ सं शि॑शातु सा॒तिं स॑मर्य॒जिद्वाजो॑ अ॒स्माँ अ॑विष्टु । तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः॒ सिन्धुः॑ पृथि॒वी उ॒त द्यौः ॥ (५)
ऋभु हमें संग्राम के निमित्त धन दें. संग्राम में विजयी बाज हमारी रक्षा करें. मित्र, वरुण अदिति, सिंधु, धरती और आकाश हमारी प्रार्थना का आदर करें. (५)
Give us money for the sake of the struggle. Let the victorious hawks in the battle protect us. Friends, Varun Aditi, Sindhu, Earth and Sky respect our prayers. (5)