हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.111.4

मंडल 1 → सूक्त 111 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 111
ऋ॒भु॒क्षण॒मिन्द्र॒मा हु॑व ऊ॒तय॑ ऋ॒भून्वाजा॑न्म॒रुतः॒ सोम॑पीतये । उ॒भा मि॒त्रावरु॑णा नू॒नम॒श्विना॒ ते नो॑ हिन्वन्तु सा॒तये॑ धि॒ये जि॒षे ॥ (४)
हम अपनी रक्षा के उद्देश्य से महान्‌ इंद्र, ऋभुओं एवं मरुतों को सोमरस पीने के लिए बुलाते हैं. वे हमें धन, यज्ञकर्म और विजय के लिए प्रेरित करें. (४)
We call the great Indras, ribhus and maruts to drink somras for the purpose of protecting us. May they inspire us to prosper, yajnakarma and victory. (4)