हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.123.9

मंडल 1 → सूक्त 123 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 123
जा॒न॒त्यह्नः॑ प्रथ॒मस्य॒ नाम॑ शु॒क्रा कृ॒ष्णाद॑जनिष्ट श्विती॒ची । ऋ॒तस्य॒ योषा॒ न मि॑नाति॒ धामाह॑रहर्निष्कृ॒तमा॒चर॑न्ती ॥ (९)
दीप्त एवं श्वेत वर्ण वाली तथा काले रंग के अंधकार से उत्पन्न होने वाली उषा दिन के पहले अंश को जानती है. उत्पन्न होने पर उषा सूर्य के तेज में मिल जाती है. उसके तेज का पराभव नहीं करती, अपितु प्रतिदिन उसकी शोभा बढ़ाती है. (९)
Usha, who is bright and white and born out of black darkness, knows the first part of the day. When born, Usha joins the sun's brightness. It does not defeat his speed, but he adorns him every day. (9)