हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.124.10

मंडल 1 → सूक्त 124 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 124
प्र बो॑धयोषः पृण॒तो म॑घो॒न्यबु॑ध्यमानाः प॒णयः॑ ससन्तु । रे॒वदु॑च्छ म॒घव॑द्भ्यो मघोनि रे॒वत्स्तो॒त्रे सू॑नृते जा॒रय॑न्ती ॥ (१०)
हे धनवती उषा! हवि देने वालों को जगाओ तथा लालची पणियों को सोने दो. तुम हवियुक्त यजमानों को समृद्ध बनाओ. तुम सुंदर नेत्री हो. तुम सब प्राणियों को क्षीण करती हो, पर अपने यजमान को उन्नत बनाओ. (१०)
O Rich Usha! Wake up the givers and let the greedy people sleep. You enrich the hosts. You are a beautiful netri. You undermine all beings, but upgrade your host. (10)