हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.124.5

मंडल 1 → सूक्त 124 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 124
पूर्वे॒ अर्धे॒ रज॑सो अ॒प्त्यस्य॒ गवां॒ जनि॑त्र्यकृत॒ प्र के॒तुम् । व्यु॑ प्रथते वित॒रं वरी॑य॒ ओभा पृ॒णन्ती॑ पि॒त्रोरु॒पस्था॑ ॥ (५)
उषा विस्तृत आकाश के पूर्व भाग में जन्म लेकर दिशाओं का ज्ञान कराती है. धरती और आकाश उसके पिता हैं. उषा इन दोनों के मध्य में स्थित होकर अपने तेज से अत्यंत विस्तीर्ण रूप से प्रसिद्ध हुई है. (५)
Usha is born in the eastern part of the wide sky and gives knowledge of the directions. The earth and the sky are his Father. Usha has become very widely famous with her sharpness by being located in the middle of these two. (5)