हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.147.1

मंडल 1 → सूक्त 147 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 147
क॒था ते॑ अग्ने शु॒चय॑न्त आ॒योर्द॑दा॒शुर्वाजे॑भिराशुषा॒णाः । उ॒भे यत्तो॒के तन॑ये॒ दधा॑ना ऋ॒तस्य॒ साम॑न्र॒णय॑न्त दे॒वाः ॥ (१)
हे अग्नि! तुम्हारी चमकती हुई और सोखने वाली लपटें अन्न एवं आयु किस प्रकार देती हैं, जिनसे पुत्र-पौत्र आदि के लिए अन्न एवं आयु प्राप्त करते हुए यज्ञ संबंधी साममंत्रों का गान करते हैं? (१)
O fire! How do your shining and soaking flames give food and age, from which the sons and grandsons sing yajna-related sammantras while receiving food and age for the sake of their children, etc.? (1)