ऋग्वेद (मंडल 1)
ई॒र्मान्ता॑सः॒ सिलि॑कमध्यमासः॒ सं शूर॑णासो दि॒व्यासो॒ अत्याः॑ । हं॒सा इ॑व श्रेणि॒शो य॑तन्ते॒ यदाक्षि॑षुर्दि॒व्यमज्म॒मश्वाः॑ ॥ (१०)
यज्ञसंबंधी अश्व जिस समय स्वर्ग के मार्ग से जाता है, उस समय घनी जांघों वाले, पतली कमर वाले एवं विक्रमशील घोड़ों के समूह दिव्य अश्व के साथ इस प्रकार चलते हैं, जिस प्रकार सितारे इस आकाश में पंक्तिबद्ध होकर चलते हैं. (१०)
At the time when the sacrificial horse passes through the path of heaven, a group of horses with thick thighs, thin waists and in a commensurate horse walk with the divine horse as the stars row in this sky. (10)