हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.186.7

मंडल 1 → सूक्त 186 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 186
उ॒त न॑ ईं म॒तयोऽश्व॑योगाः॒ शिशुं॒ न गाव॒स्तरु॑णं रिहन्ति । तमीं॒ गिरो॒ जन॑यो॒ न पत्नीः॑ सुर॒भिष्ट॑मं न॒रां न॑सन्त ॥ (७)
जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार घोड़ों के समान वेगशाली हमारी बुद्धियां नित्ययुवा इंद्र को घेरती हैं. स्त्रियां जिस प्रकार पति को पाकर संतान उत्पन्न करती हैं, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां इंद्र के पास पहुंचकर फलों को जन्म दें. (७)
Just as cows lick calves, so our intellects, as fast as horses, surround the eternally young Indra. Just as women produce children by having a husband, so let our praises reach Indra and give birth to the fruits. (7)