हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.22.10

मंडल 1 → सूक्त 22 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
आ ग्ना अ॑ग्न इ॒हाव॑से॒ होत्रां॑ यविष्ठ॒ भार॑तीम् । वरू॑त्रीं धि॒षणां॑ वह ॥ (१०)
हे अग्नि! हमारी रक्षा के लिए देवपत्नियों को यहां ले आओ. हे अत्यंत युवा अग्नि! हमें ऐसी वाणी दो, जिससे हम देवों को बुला सकें एवं निष्ठापूर्वक सत्य भाषण कर सकें. (१०)
O agni! Bring the gods and goddesses here to protect us. Oh, very young agni! Give us a voice so that we can call the gods and speak the truth faithfully. (10)