हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.51.6

मंडल 1 → सूक्त 51 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
त्वं कुत्सं॑ शुष्ण॒हत्ये॑ष्वावि॒थार॑न्धयोऽतिथि॒ग्वाय॒ शम्ब॑रम् । म॒हान्तं॑ चिदर्बु॒दं नि क्र॑मीः प॒दा स॒नादे॒व द॑स्यु॒हत्या॑य जज्ञिषे ॥ (६)
हे इंद्र! तुमने शुष्ण असुर के साथ भयानक संग्राम में कुत्स ऋषि की रक्षा की थी तथा अतिथियों का स्वागत करने वाले दिवोदास को बचाने के लिए शंबर असुर का वध किया था. तुमने अर्बुद नामक महान्‌ असुर को पैरों से कुचल डाला था. इस प्रकार तुम्हारा जन्म दस्युनाश के लिए हुआ जान पड़ता है. (६)
O Indra! You had protected the sage Kuts in a terrible battle with the Shushna Asura and killed the Sambar Asura to save the Divodas who welcomed the guests. You crushed the great asura named Arbud with your feet. Thus you seem to have been born to bandit. (6)