हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.63.5

मंडल 1 → सूक्त 63 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
त्वं ह॒ त्यदि॒न्द्रारि॑षण्यन्दृ॒ळ्हस्य॑ चि॒न्मर्ता॑ना॒मजु॑ष्टौ । व्य१॒॑स्मदा काष्ठा॒ अर्व॑ते वर्घ॒नेव॑ वज्रिञ्छ्नथिह्य॒मित्रा॑न् ॥ (५)
हे इंद्र! यद्यपि तुम किसी दृढ़ व्यक्ति को हानि पहुंचाना नहीं चाहते हो, फिर भी यदि हम स्तोताओं को शत्रु घेर लेते हैं तो तुम हमारे घोड़ों के चलने के लिए सभी दिशाओं को मुक्त कर देते हो. हे वञ्रधारी इंद्र! कठिन वज्र से हमारे शत्रुओं को मारो. (५)
O Indra! Although you do not want to harm a strong person, if we surround the Psalms with enemies, you free all directions for our horses to walk. O Lord Indra! Kill our enemies with a hard thunderbolt. (5)