हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.101.4

मंडल 10 → सूक्त 101 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
सीरा॑ युञ्जन्ति क॒वयो॑ यु॒गा वि त॑न्वते॒ पृथ॑क् । धीरा॑ दे॒वेषु॑ सुम्न॒या ॥ (४)
बुद्धिमान्‌ ऋत्विज्‌ हल जोड़ते हैं एवं जुआ हल से अलग करते हैं. धीर पुरुष देवों का स्तोत्र बोलते हैं. (४)
Intelligent solutions add solutions and separate gambling from ploughs. Patient men speak the hymns of the gods. (4)