हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.101.5

मंडल 10 → सूक्त 101 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
निरा॑हा॒वान्कृ॑णोतन॒ सं व॑र॒त्रा द॑धातन । सि॒ञ्चाम॑हा अव॒तमु॒द्रिणं॑ व॒यं सु॒षेक॒मनु॑पक्षितम् ॥ (५)
हे मित्रो! पशुओं के लिए प्याऊ एवं चमड़े की रस्सी बनाओ. हम जलयुक्त सींचने में समर्थ एवं क्षीण न होने वाले गड्ढे से पानी लेकर सींचते हैं. (५)
Oh, my friends! Make drink and leather rope for animals. We take water from a pit that is capable of watering and is not able to irrigate water. (5)