हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.105.10

मंडल 10 → सूक्त 105 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 105
श्रि॒ये ते॒ पृश्नि॑रुप॒सेच॑नी भूच्छ्रि॒ये दर्वि॑ररे॒पाः । यया॒ स्वे पात्रे॑ सि॒ञ्चस॒ उत् ॥ (१०)
हे इंद्र! दूध देने वाली गाय तुम्हारे सोम हेतु दूध दे. तुम करछुली के द्वारा अपने पात्र में मधु लेते हो. वह स्वच्छ एवं कल्याणकर हो. (१०)
O Indra! The milking cow give milk for your mon. You take honey in your vessel through a curchle. He is clean and well-being. (10)