हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.105.9

मंडल 10 → सूक्त 105 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 105
ऊ॒र्ध्वा यत्ते॑ त्रे॒तिनी॒ भूद्य॒ज्ञस्य॑ धू॒र्षु सद्म॑न् । स॒जूर्नावं॒ स्वय॑शसं॒ सचा॒योः ॥ (९)
हे इंद्र! तुम्हारे ऋत्विजों ने यज्ञशाला में जिस समय तुमसे संबंधित यज्ञक्रिया आरंभ की, उस समय तुमने यजमान के साथ एक नाव पर सवार होकर उसका उद्धार किया. (९)
O Indra! At the time when your sages started the yajna kriya related to you in the yajnashala, you saved him by boarding a boat with the host. (9)