हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.105.2

मंडल 10 → सूक्त 105 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 105
हरी॒ यस्य॑ सु॒युजा॒ विव्र॑ता॒ वेरर्व॒न्तानु॒ शेपा॑ । उ॒भा र॒जी न के॒शिना॒ पति॒र्दन् ॥ (२)
हरि नामक दो घोड़े दौड़ने में कुशल ठीक-ठीक से सिखाए गए एवं श्वेत केशों वाले हैं. इन घोड़ों के स्वामी इंद्र दान करने आवें. (२)
Two horses named Hari are well-taught and have white hairs, who are skilled in running. Indra, the lord of these horses, should come to daan. (2)