ऋग्वेद (मंडल 10)
आ नो॑ य॒ज्ञं भार॑ती॒ तूय॑मे॒त्विळा॑ मनु॒ष्वदि॒ह चे॒तय॑न्ती । ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदं स्यो॒नं सर॑स्वती॒ स्वप॑सः सदन्तु ॥ (८)
सूर्यदीप्ति हमारे यज्ञ में शीघ्र आवें. इड़ादेवी इस यज्ञ का ज्ञान करके यहां मनुष्य के समान पधारें. इन दोनों के साथ सरस्वती देवी मिलें एवं तीनों देवियां इस सुखकर यज्ञ में बैठे. (८)
May the sun shine come soon in our yajna. Idadevi comes here like a human being by knowing this yajna. Meet Goddess Saraswati with these two and the three goddesses sit in this happy yagna. (8)