हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.110.9

मंडल 10 → सूक्त 110 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 110
य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी जनि॑त्री रू॒पैरपिं॑श॒द्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । तम॒द्य हो॑तरिषि॒तो यजी॑यान्दे॒वं त्वष्टा॑रमि॒ह य॑क्षि वि॒द्वान् ॥ (९)
हे होता! जिन त्वष्टा देव ने देवों की माता के समान द्यावा-पृथिवी को बनाकर उन्हें भांति-भांति के प्राणियों से युक्त किया है, उन्हीं त्वष्टा देव की तुम पूजा करो. तुम आज अन्न वाले हो, विद्वान्‌ हो एवं सर्वश्रेष्ठ यज्ञकर्ता हो. (९)
It was! You should worship the same Tvashta Dev, who has made the divine-earth like the mother of the gods, and has made them a variety of beings. You are the one who eats today, you are a scholar and the best sacrificer. (9)