हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.113.2

मंडल 10 → सूक्त 113 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 113
तम॑स्य॒ विष्णु॑र्महि॒मान॒मोज॑सां॒शुं द॑ध॒न्वान्मधु॑नो॒ वि र॑प्शते । दे॒वेभि॒रिन्द्रो॑ म॒घवा॑ स॒याव॑भिर्वृ॒त्रं ज॑घ॒न्वाँ अ॑भव॒द्वरे॑ण्यः ॥ (२)
विष्णु ने सोमलता का टुकड़ा देकर उत्साह के साथ इंद्र की उस महिमा की घोषणा की है. धनस्वामी इंद्र ने साथ चलने वाले देवों की सहायता से वृत्र का वध किया और सर्वोत्तम बने. (२)
Vishnu has enthusiastically announced that glory of Indra by giving a piece of Somalata. Dhanaswami Indra killed Vrithra with the help of the gods who walked along and became the best. (2)