ऋग्वेद (मंडल 10)
घ॒र्मा सम॑न्ता त्रि॒वृतं॒ व्या॑पतु॒स्तयो॒र्जुष्टिं॑ मात॒रिश्वा॑ जगाम । दि॒वस्पयो॒ दिधि॑षाणा अवेषन्वि॒दुर्दे॒वाः स॒हसा॑मानम॒र्कम् ॥ (१)
दिगंतों में व्याप्त एवं दीप्तिशाली सूर्य-चंद्र ने तीनों लोकों को व्याप्त किया है. वायु ने इन दोनों की प्रसन्नता प्राप्त की है. देवों ने जिस समय सामवेद के मंत्रों के साथ सूर्य को प्राप्त किया, उस समय तीनों की रक्षा के लिए दिव्य जल बनाया. (१)
The sun-moon, which pervades the aziguas and the bright moon, has permeated the three realms. The wind has enjoyed the happiness of both of them. The devas created divine water to protect the three at the time when they received the sun with the mantras of the Samaveda. (1)