ऋग्वेद (मंडल 10)
एकः॑ सुप॒र्णः स स॑मु॒द्रमा वि॑वेश॒ स इ॒दं विश्वं॒ भुव॑नं॒ वि च॑ष्टे । तं पाके॑न॒ मन॑सापश्य॒मन्ति॑त॒स्तं मा॒ता रे॑ळ्हि॒ स उ॑ रेळ्हि मा॒तर॑म् ॥ (४)
प्राणवायुरूपी पक्षी ब्रह्मांडरूपी सागर में घुसा. वह सारे संसार को देखता है. मैंने परिपक्व मन से उसे देखा है. उसे माता चाटती है और वह माता को चाटता है. (४)
The zoonoyrupi bird entered the cosmological sea. He sees the whole world. I have looked at him with a mature mind. His mother licks him and he licks the mother. (4)