ऋग्वेद (मंडल 10)
हन्ता॒हं पृ॑थि॒वीमि॒मां नि द॑धानी॒ह वे॒ह वा॑ । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (९)
मैं धरती को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रख सकता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (९)
I can lift up the earth from one place to another. I've been to sompan several times. (9)