ऋग्वेद (मंडल 10)
शु॒नम॒स्मभ्य॑मू॒तये॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । शर्म॑ यच्छन्तु स॒प्रथ॑ आदि॒त्यासो॒ यदीम॑हे॒ अति॒ द्विषः॑ ॥ (७)
वरुण, मित्र और अर्यमा रक्षा के साथ ही हमें सुख दें. आदित्यगण हमें विस्तृत सुख दें एवं शत्रुओं से बचावें. (७)
Varun, friends and Aryama raksha as well as give us happiness. Adityagana give us vast happiness and protect us from enemies. (7)