ऋग्वेद (मंडल 10)
न तमंहो॒ न दु॑रि॒तं देवा॑सो अष्ट॒ मर्त्य॑म् । स॒जोष॑सो॒ यम॑र्य॒मा मि॒त्रो नय॑न्ति॒ वरु॑णो॒ अति॒ द्विषः॑ ॥ (१)
हे देवो! उस पुरुष को कोई भी अमंगल एवं पाप प्राप्त नहीं करता, जिसे अर्यमा, मित्र एवं वरुण मिलकर श्रु के हाथ से बचाते हैं. (१)
O God! No one receives the evil and sin of that man, whom Aryama, friends and Varuna together save from Shru's hand. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
तद्धि व॒यं वृ॑णी॒महे॒ वरु॑ण॒ मित्रार्य॑मन् । येना॒ निरंह॑सो यू॒यं पा॒थ ने॒था च॒ मर्त्य॒मति॒ द्विषः॑ ॥ (२)
हे वरुण, मित्र एवं अर्यमा! हम तुमसे उसी रक्षा को मांगते हैं, जिससे तुम मानवों को निष्पाप करते हो एवं शत्रुओं से बचाते हो. (२)
Hey Varun, friend and Aryama! We ask you for the same protection by which you annihilate human beings and save them from enemies. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
ते नू॒नं नो॒ऽयमू॒तये॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । नयि॑ष्ठा उ नो ने॒षणि॒ पर्षि॑ष्ठा उ नः प॒र्षण्यति॒ द्विषः॑ ॥ (३)
वरुण, मित्र एवं अर्यमा निश्चय ही हमारी रक्षा करेंगे. तुम हमें आगे ले चलो, पापों से पार करो तथा शत्रु से बचाओ. (३)
Varun, friends and Aryama will definitely protect us. Take us forward, overcome sins and save us from the enemy. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यू॒यं विश्वं॒ परि॑ पाथ॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । यु॒ष्माकं॒ शर्म॑णि प्रि॒ये स्याम॑ सुप्रणीत॒योऽति॒ द्विषः॑ ॥ (४)
हे वरुण, मित्र एवं अर्यमा! तुम संसार की रक्षा करते हो. हे शोभन-नेतृत्व वाले देवो! हम तुम्हारे द्वारा दिया हुआ अनुकूल सुख भोगें एवं शत्रुओं से बचें. (४)
Hey Varun, friend and Aryama! You protect the world. O shobhan-led devo! Let us enjoy the favorable pleasures you have given us and avoid enemies. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
आ॒दि॒त्यासो॒ अति॒ स्रिधो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । उ॒ग्रं म॒रुद्भी॑ रु॒द्रं हु॑वे॒मेन्द्र॑म॒ग्निं स्व॒स्तयेऽति॒ द्विषः॑ ॥ (५)
आदित्य, वरुण, मित्र और अर्यमा हमें शत्रु से बचावें. हम शत्रु से बचने एवं कल्याण पाने के लिए उग्र रुद्र, मरुद्गण, इंद्र एवं अग्नि को बुलाते हैं. (५)
Aditya, Varun, friends and Aryama protect us from the enemy. We call the furious Rudra, The Marudgana, Indra and Agni to escape the enemy and get welfare. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
नेता॑र ऊ॒ षु ण॑स्ति॒रो वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । अति॒ विश्वा॑नि दुरि॒ता राजा॑नश्चर्षणी॒नामति॒ द्विषः॑ ॥ (६)
वरुण, मित्र और अर्यमा कुशल नेता हैं. ये हमें पाप से दूर ले जावें. प्रजाओं के स्वामी उक्त देव हमें सभी पापों एवं शत्रुओं से बचावें. (६)
Varun, a friend and Aryama are skilled leaders. Let them take us away from sin. May the lord of the people save us from all sins and enemies. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
शु॒नम॒स्मभ्य॑मू॒तये॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । शर्म॑ यच्छन्तु स॒प्रथ॑ आदि॒त्यासो॒ यदीम॑हे॒ अति॒ द्विषः॑ ॥ (७)
वरुण, मित्र और अर्यमा रक्षा के साथ ही हमें सुख दें. आदित्यगण हमें विस्तृत सुख दें एवं शत्रुओं से बचावें. (७)
Varun, friends and Aryama raksha as well as give us happiness. Adityagana give us vast happiness and protect us from enemies. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यथा॑ ह॒ त्यद्व॑सवो गौ॒र्यं॑ चित्प॒दि षि॒ताममु॑ञ्चता यजत्राः । ए॒वो ष्व१॒॑स्मन्मु॑ञ्चता॒ व्यंहः॒ प्र ता॑र्यग्ने प्रत॒रं न॒ आयुः॑ ॥ (८)
यज्ञ करते हुए वसुओं ने पैरों से बंधी हुई गाय को छुड़ा दिया था. हे अग्नि! हमें उसी प्रकार पाप से छुड़ाओ एवं उत्तम तथा विशाल आयु दो. (८)
While performing the yajna, the vasus had rescued the cow tied to the feet. O agni! In the same way redeem us from sin and give us a better and greater life. (8)