ऋग्वेद (मंडल 10)
रात्री॒ व्य॑ख्यदाय॒ती पु॑रु॒त्रा दे॒व्य१॒॑क्षभिः॑ । विश्वा॒ अधि॒ श्रियो॑ऽधित ॥ (१)
रात्रि देवी आती हुई चारों ओर विस्तृत हुई एवं उन्होंने नक्षत्रं द्वारा संपूर्ण शोभा प्राप्त की. (१)
The night goddess came and expanded all around and she attained full splendor by the nakshatras. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
ओर्व॑प्रा॒ अम॑र्त्या नि॒वतो॑ दे॒व्यु१॒॑द्वतः॑ । ज्योति॑षा बाधते॒ तमः॑ ॥ (२)
मरणरहित व दिव्य रात्रि ने विस्तृत आकाश को व्याप्त किया तथा नीचे एवं ऊंचे रहने वाले पदार्थो को ढक लिया. रात्रि तारों के प्रकाश से अंधकार को बाधा पहुंचाती है. (२)
The deathless and divine night pervaded the vast sky and covered the things that were living below and high. The light of the night stars hinders the darkness. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
निरु॒ स्वसा॑रमस्कृतो॒षसं॑ दे॒व्या॑य॒ती । अपेदु॑ हासते॒ तमः॑ ॥ (३)
रात्रि देवी ने आकर उषा को अपनी बहिन के रूप में स्वीकार किया तथा अंधकार को हानि पहुंचाई. (३)
The night goddess came and accepted Usha as her sister and harmed the darkness. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
सा नो॑ अ॒द्य यस्या॑ व॒यं नि ते॒ याम॒न्नवि॑क्ष्महि । वृ॒क्षे न व॑स॒तिं वयः॑ ॥ (४)
हमारे लिए वह रात्रि कल्याणकारिणी बने, जिसके आने पर हम पेड़ पर रहने वाले पक्षियों के समान सो जाते हैं. (४)
For us, the night becomes a benefactor, when we come to sleep like birds living on the tree. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
नि ग्रामा॑सो अविक्षत॒ नि प॒द्वन्तो॒ नि प॒क्षिणः॑ । नि श्ये॒नास॑श्चिद॒र्थिनः॑ ॥ (५)
सारा गांव शांत है. पैरों से चलने वाले पक्षी एवं गतिशील बाज पक्षी सब सो रहे हैं. (५)
The whole village is quiet. The birds that run on the feet and the moving hawk birds are all sleeping. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
या॒वया॑ वृ॒क्यं१॒॑ वृकं॑ य॒वय॑ स्ते॒नमू॑र्म्ये । अथा॑ नः सु॒तरा॑ भव ॥ (६)
हे रात्रि! तुम भेड़िए, भेड़िए की पत्नी एवं चोर को हमसे दूर करो. तुम हमारे लिए विशेष रीति से सुखकारी बनो. (६)
O night! Take away from us the wolf, the wolf's wife and the thief. Be especially pleasing to us. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
उप॑ मा॒ पेपि॑श॒त्तमः॑ कृ॒ष्णं व्य॑क्तमस्थित । उष॑ ऋ॒णेव॑ यातय ॥ (७)
सब वस्तुओं को ढकने वाला काला आकार विशेष रूप से मेरे पास तक आ गया है. हे उषा! इस अंधकार को ऋण के समान हटाओ. (७)
The black shape that covers all the objects has come especially to me. Oh, Usha! Remove this darkness similar to debt. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
उप॑ ते॒ गा इ॒वाक॑रं वृणी॒ष्व दु॑हितर्दिवः । रात्रि॒ स्तोमं॒ न जि॒ग्युषे॑ ॥ (८)
हे रात्रि! तुम आकाश की कन्या हो. मुझ शत्रुजयी का यह स्तोत्र तुम स्वीकार करो. मैं गाय के समान तुम्हें यह स्तोत्र भेंट कर रहा हूं. (८)
O night! You are the virgo of the sky. Accept this psalm of my enemy. I am offering you this hymn like a cow. (8)