हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.127.7

मंडल 10 → सूक्त 127 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 127
उप॑ मा॒ पेपि॑श॒त्तमः॑ कृ॒ष्णं व्य॑क्तमस्थित । उष॑ ऋ॒णेव॑ यातय ॥ (७)
सब वस्तुओं को ढकने वाला काला आकार विशेष रूप से मेरे पास तक आ गया है. हे उषा! इस अंधकार को ऋण के समान हटाओ. (७)
The black shape that covers all the objects has come especially to me. Oh, Usha! Remove this darkness similar to debt. (7)