ऋग्वेद (मंडल 10)
अग्ने॒ नक्ष॑त्रम॒जर॒मा सूर्यं॑ रोहयो दि॒वि । दध॒ज्ज्योति॒र्जने॑भ्यः ॥ (४)
हे अग्नि! तुम सदा चलने वाले जरारहित तथा लोगों को प्रकाश देने वाले सूर्य को आकाश में स्थित करो. (४)
O agni! "You place in the sky the sun, which is always moving, unharmed and which gives light to the people. (4)