हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.156.5

मंडल 10 → सूक्त 156 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 156
अग्ने॑ के॒तुर्वि॒शाम॑सि॒ प्रेष्ठः॒ श्रेष्ठ॑ उपस्थ॒सत् । बोधा॑ स्तो॒त्रे वयो॒ दध॑त् ॥ (५)
हे अग्नि! तुम प्रजाओं का ज्ञान कराने वाले, अतिशय प्रिय एवं श्रेष्ठ हो. तुम यज्ञशाला में बैठो, स्तुतियां और अन्न धारण करो. (५)
O agni! You are the ones who give knowledge of the people, the most beloved and the best. Sit in the yajnashala, hold on to the praises and the food. (5)