ऋग्वेद (मंडल 10)
ब्रह्म॑णा॒ग्निः सं॑विदा॒नो र॑क्षो॒हा बा॑धतामि॒तः । अमी॑वा॒ यस्ते॒ गर्भं॑ दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑ ॥ (१)
राक्षसहंता अग्नि मंत्रों के साथ मिलकर यहां से राक्षसों को नष्ट करें. हे नारी! तुम्हारी योनि का आश्रय जो बाधाएं एवं रोग ले रहे हैं एवं तुम्हारे गर्भ को हानि पहुंचाते हैं, वे नष्ट हों. (१)
Destroy the demons from here together with the demons' agni mantras. O woman! The obstacles and diseases that are taking shelter of your vagina and harming your womb, they should be destroyed. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्ते॒ गर्भ॒ममी॑वा दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑ । अ॒ग्निष्टं ब्रह्म॑णा स॒ह निष्क्र॒व्याद॑मनीनशत् ॥ (२)
हे नारी! जो रोग अथवा उपद्रव तुम्हारे मार्ग एवं तुम्हारी योनि में आश्रित हैं, राक्षसनाशक अनने स्तुतिमंत्रों के साथ उसे समाप्त करें. (२)
O woman! Eliminate the disease or disturbance that is dependent on your path and in your vagina, with the demonic anne hymns. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्ते॒ हन्ति॑ प॒तय॑न्तं निष॒त्स्नुं यः स॑रीसृ॒पम् । जा॒तं यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (३)
हे नारी! जो राक्षस आदि तुम्हारे पति के वीर्य स्खलन के समय, गर्भ में वीर्य के स्थित होने पर, गर्भ के चलने पर अथवा संतानोत्पत्ति के समय नष्ट करने की अभिलाषा करता है, उसे हम यहां से दूर भगाते हैं. (३)
O woman! We drive away the demon, etc., who desires to destroy your husband at the time of ejaculation of semen, when the semen is located in the womb, when the womb is moving, or at the time of procreation. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्त॑ ऊ॒रू वि॒हर॑त्यन्त॒रा दम्प॑ती॒ शये॑ । योनिं॒ यो अ॒न्तरा॒रेळ्हि॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (४)
हे नारी! जो राक्षस आदि गर्भनाश के लिए तुम्हारी जंघाओं को फैला देता है, तुम पति- पत्नी के बीच में सो जाता है अथवा जो योनि के भीतर घुस कर गिरे हुए पुरुषवीर्य को चाट लेता है, उसे हम यहां से दूर भगाते हैं. (४)
O woman! We drive away the demon who spreads your thighs for the sake of the celestial ventricle, you fall asleep in the middle of the husband and wife or who licks the fallen male semen inside the vagina. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्त्वा॒ भ्राता॒ पति॑र्भू॒त्वा जा॒रो भू॒त्वा नि॒पद्य॑ते । प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (५)
हे नारी! जो राक्षसादि तुम्हारा भाई, पति अथवा प्रेमी बनकर तुम्हारे समीप जाता है एवं तुम्हारी संतान को नष्ट करना चाहता है, उसे हम यहां से भगाते हैं. (५)
O woman! We drive out the demon who goes to you as your brother, husband or lover and wants to destroy your child. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्त्वा॒ स्वप्ने॑न॒ तम॑सा मोहयि॒त्वा नि॒पद्य॑ते । प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (६)
हे नारी! जो राक्षसादि स्वप्न या सुषुप्ति की अवस्था में तुम्हें मोहित करके तुम्हारे पास जाता है एवं तुम्हारी संतान को मारना चाहता है, उसे हम यहां से दूर भगाते हैं. (६)
O woman! Whoever fascinates you in the state of demonic dream or sleep and goes to you and wants to kill your child, we drive him away from here. (6)