हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.162.5

मंडल 10 → सूक्त 162 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 162
यस्त्वा॒ भ्राता॒ पति॑र्भू॒त्वा जा॒रो भू॒त्वा नि॒पद्य॑ते । प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि ॥ (५)
हे नारी! जो राक्षसादि तुम्हारा भाई, पति अथवा प्रेमी बनकर तुम्हारे समीप जाता है एवं तुम्हारी संतान को नष्ट करना चाहता है, उसे हम यहां से भगाते हैं. (५)
O woman! We drive out the demon who goes to you as your brother, husband or lover and wants to destroy your child. (5)