ऋग्वेद (मंडल 10)
प्र वो॑ ग्रावाणः सवि॒ता दे॒वः सु॑वतु॒ धर्म॑णा । धू॒र्षु यु॑ज्यध्वं सुनु॒त ॥ (१)
हे पत्थरो! सविता देव अपने प्रेरणात्मक कर्म से तुम्हें सोमरस निचोड़ने में लगावें. तुम सभी स्थानों में नियुक्त होकर सोमरस निचोड़ो. (१)
O stones! May Savita Dev engage you in squeezing the somras with her inspirational deeds. You squeeze the somras by being appointed in all places. (1)