हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.175.1

मंडल 10 → सूक्त 175 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 175
प्र वो॑ ग्रावाणः सवि॒ता दे॒वः सु॑वतु॒ धर्म॑णा । धू॒र्षु यु॑ज्यध्वं सुनु॒त ॥ (१)
हे पत्थरो! सविता देव अपने प्रेरणात्मक कर्म से तुम्हें सोमरस निचोड़ने में लगावें. तुम सभी स्थानों में नियुक्त होकर सोमरस निचोड़ो. (१)
O stones! May Savita Dev engage you in squeezing the somras with her inspirational deeds. You squeeze the somras by being appointed in all places. (1)