हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.175.2

मंडल 10 → सूक्त 175 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 175
ग्रावा॑णो॒ अप॑ दु॒च्छुना॒मप॑ सेधत दुर्म॒तिम् । उ॒स्राः क॑र्तन भेष॒जम् ॥ (२)
हे पत्थरो! दुःख पहुंचाने वाली प्रजा एवं दुर्बुद्धि को हमसे दूर करो. तुम गायों को हमारे लिए ओषधि तुल्य बनाओ. (२)
O stones! Remove from us the suffering people and the evil-doers. You make the cows equal to the opulents for us. (2)