हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.185.1

मंडल 10 → सूक्त 185 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 185
महि॑ त्री॒णामवो॑ऽस्तु द्यु॒क्षं मि॒त्रस्या॑र्य॒म्णः । दु॒रा॒धर्षं॒ वरु॑णस्य ॥ (१)
वरुण, मित्र एवं अर्यमा-इन तीन देवों का दीप्तिशाली, अपराजेय एवं महान्‌ रक्षण हमें प्राप्त हो. (१)
Varuna, friends and Ariyama - may we receive the glorious, invincible and great protection of these three gods. (1)