हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.185.2

मंडल 10 → सूक्त 185 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 185
न॒हि तेषा॑म॒मा च॒न नाध्व॑सु वार॒णेषु॑ । ईशे॑ रि॒पुर॒घशं॑सः ॥ (२)
वरुण, अर्यमा एवं मित्र द्वारा अनुगृहीत स्तोताओं को घर, मार्ग एवं दुर्गम स्थान में बुरा चाहने वाला शत्रु नहीं दबा सकता. (२)
The enemies who want to be evil in the house, the road and the inaccessible places cannot suppress the hymns adopted by Varun, Aryama and mitra. (2)